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Thursday, 23 February 2012

उड़ने दो पतंग


उड़ने दो पतंग अभी तो  बाकी है आसमान 
उड़ने दो पतंग अभी तोह बाकी है उड़ान 
दूसरी पतंगों का डर  नहीं मुझे 
बस हवाओं में लेहेराना है 
तारों से भी दूर है मंजिल मेरी 
अपना रास्ता बनाते हुए आगे निकल जाना  है            

उड़ने दो पतंग अभी तो बाकी है आसमान 
उड़ने दो पतंग अभी तोह बाकी है उड़ान
मज़बूत और तेज़ है मांजा मेरा 
किसी से भी लड़ जाऊँगा 
अँधेरे का भी डर नहीं 
रात में भी उड़ जाऊँगा 

उड़ने दो पतंग अभी तो बाकी है आसमान 
उड़ने दो पतंग अभी तोह बाकी है उड़ान
कट भी गया तो कोई दुख नहीं 
फिज़ा  के साथ कही और पहुच जाऊँगा 
जिसको भी मिला उसी के साथ उड़ जाऊँगा  

उड़ने दो पतंग अभी तो बाकी है आसमान ............
उड़ने दो पतंग अभी तो बाकी है उड़ान......

Saturday, 4 February 2012

वो पुरानी डायरी


उन किताबों में एक पुरानी डायरी भी थी 
थोड़ी धूल जमी  थी   उस  पर, 
खुद  हाथो  से   साफ़  किया 
पन्ने  कुछ  पीले  पढ़  चुके  थे  उसके  
और  आँखों  से  एक  आंसू  छलक  कर   गिर  पड़ा  उस  पर   

उन किताबों में एक पुरानी डायरी भी थी
कुछ  खट्टी, कुछ  मीठी 
यादें  बसी  थी  उसमे, 
गुलाब  का  एक  फूल  भी  था   उसमे   
पत्तियाँ  सूख  के टूट  चुकी  थी  उसकी  
पर  खुशबू   अभी  भी  बाकी  थी उसमे  

उन किताबों में एक पुरानी डायरी भी थी
कुछ  सालो  पहले  खो  गई  थी  मेरी  डायरी, 
आज  मिली  तो  याद  आ  गई  
उन स्याही के दिनों  की 
और  लौट  आई  जीने  की  आस  
पर  आज  न  वो  स्याही  है  न  ही  वो  दिन 
मैंने  खुद  को  खो  दिया  है  कही 

उन किताबों में एक पुरानी डायरी भी थी.........